Victory For Travancore Ex-Royal Household: Padmanabhaswamy temple to be managed by Ex-Royal Household – त्रावणकोर के पूर्व शाही परिवार की बड़ी जीत, SC ने कहा- परिवार के पास ही रहेगा पद्मनाभस्वामी मंदिर के प्रबंधन का अधिकार

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पद्मनाभस्वामी मंदिर के प्रबंधन और अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला (फाइल फोटो)

केरल के तिरुवनन्तपुरम स्थित पद्मनाभस्वामी मंदिर (Sree Padmanabhaswamy Temple) के प्रबंधन और अधिकार को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अहम फैसला सुनाया. शीर्ष न्यायालय ने कहा कि शासक की मृत्यु के बावजूद पद्मनाभस्वामी मंदिर में त्रावणकोर परिवार का अधिकार जारी रहेगा. जिला न्यायाधीश के साथ ही परिवार द्वारा दी गई योजना जारी है. प्रथा के अनुसार, शासक की मृत्यु पर परिवार का शबैत मतलब प्रबंधन का अधिकार बरकरार रहेगा. 

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सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, ” 2011 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति अंतरिम रूप से जारी रहेगी. शाही परिवार फाइनल समिति का गठन करेगा. तिजोरी बी को खोला जाए या नहीं, ये शाही परिवार द्वारा बनाई गई फाइनल समिति तय करेगी.”

सुप्रीम कोर्ट में केरल के तिरुवनन्तपुरम स्थित श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर में वित्तीय गड़बड़ी को लेकर प्रबंधन और प्रशासन का विवाद नौ सालों से लंबित था. केरल हाईकोर्ट के फैसले को त्रावणकोर के पूर्व शाही परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. मंदिर के पास करीब दो लाख करोड़ रु. की संपत्ति है. भगवान पद्मनाभ (विष्णु) के इस भव्य मंदिर का पुननिर्माण 18वीं सदी में इसके मौजूदा स्वरूप में त्रावणकोर शाही परिवार ने कराया था. इसी शाही परिवार ने 1947 में भारतीय संघ में विलय से पहले दक्षिणी केरल और उससे लगे तमिलनाडु के कुछ भागों पर शासन किया था. 

स्वतंत्रता के बाद भी मंदिर का संचालन पूर्ववर्ती राजपरिवार नियंत्रित ट्रस्ट ही करता रहा है. सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की बेंच ने पिछले साल 10 अप्रैल को मामले में केरल हाईकोर्ट के 31 जनवरी, 2011 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था. 

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मंदिर, उसकी संपत्तियों का प्रबंधन संभालने तथा परिपाटियों के अनुरूप मंदिर का संचालन करने के लिए एक निकाय या ट्रस्ट बनाने को कहा था. सुप्रीम कोर्टको तय करना था कि कि देश के सबसे अमीर मंदिर का मैनेजमेंट राज्य सरकार देखेगी या त्रावणकोर का पूर्व शाही परिवार. सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर सुनवाई हुई कि क्या यह मंदिर सार्वजनिक संपत्ति है और इसके लिए तिरुपति तिरुमला, गुरुवयूर और सबरीमला मंदिरों की तरह ही देवस्थानम बोर्ड की स्थापना की जरूरत है या नहीं? 

त्रावणकोर के पूर्ववर्ती शाही परिवार का मंदिर पर किस हद तक अधिकार होगा और क्या मंदिर के सातवें तहखाने को खोला जाए या नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने मई 2011 में मंदिर के प्रबंधन और संपत्तियों पर नियंत्रण से संबंधित हाईकोर्ट के निर्देश पर रोक लगा दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मंदिर के खजाने में मूल्यवान वस्तुओं, आभूषणों का भी विस्तृत विवरण तैयार किया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने 8 जुलाई 2011 को कहा था कि मंदिर के तहखाने-बी के खुलने की प्रक्रिया पर अगले आदेश तक रोक रहेगी, जुलाई 2017 में कोर्ट ने कहा था कि वह इन दावों का अध्ययन करेगा कि मंदिर के एक तहखाने में रहस्यमयी ऊर्जा वाला अपार खजाना है.

वीडियो: पद्मनाभस्वामी मंदिर : छठा कमरा खुलना बाकी है

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