Disaster on Congress authorities in Rajasthan, tussle between Sachin Pilot and Ashok Gehlot, 10 factors

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अशोक गहलोत के साथ सचिन पायलट (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:
मध्य प्रदेश और ज्योतिरादित्य सिंधिया को खोने के तीन महीने बाद कांग्रेस राजस्थान में भी गहरे संकट में है. कारण है राज्य में पार्टी के पुराने गार्ड और नए के बीच लंबे समय से चली आ रही खींचतान.  राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट, जो अनुभवी अशोक गहलोत के सामने सीएम पद की दौड़ में हार गए थे वो आजकल  वो बीजेपी के साथ बातचीत कर रहे हैं, ऐसा उनके करीबी सूत्रों ने कहा है. सूत्रों का दावा है कि पायलट को पास 16 विधायकों और तीन निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन है. सूत्रों का कहना है कि इस बारे में चर्चा लॉकडाउन के पहले से चल रही है. लेकिन हालात तब बिगड़े जब सरकार को अस्थिर करने के आरोपों पर डिप्टी सीएम सचिन पायलट को ही स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप  (एसओजी) ने पूछताछ के लिए समन भेज दिया. बता दें कि एसओजी राजस्थान सरकार के गृह मंत्रालय के अंतर्गत आता है जो कि सीएम गहलोत ही देख रहे हैं. अब सचिन पायलट अपने विश्वासपात्र विधायकों के साथ दिल्ली में हैं. कुछ नेताओं ने कहा कि पायलट एक क्षेत्रीय पार्टी बना सकते हैं, क्योंकि बीजेपी उन्हें मुख्यमंत्री पद का प्रस्ताव देने के लिए तैयार नहीं है. वहीं बीजेपी ने भी पायलट के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत से इनकार किया है.

मामले से जुड़ी अहम जानकारियां :

  1. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज रात नौ बजे अपने आवास पर विधायक दल की बैठक बुलाई है. सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस आलाकमान सचिन पायलट पर सवाल उठाने के आदेश जारी करने से नाराज है. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “सोनिया और राहुल गांधी दोनों को स्थिति के बारे में जानकारी दी गई है. हमें विश्वास है कि हम मध्य प्रदेश की स्थिति को फिर से नहीं बनने देंगे.”

  2. अशोक गहलोत के सहयोगियों ने कहा कि उन्होंने बैठक में भाग लेने के लिए सचिन पायलट को आमंत्रित किया है, लेकिन उनसे संपर्क करने में विफल रहे. सूत्रों ने कहा, “हमने इस बैठक का आयोजन बीजेपी को रोकने के लिए किया है, जो मध्यप्रदेश या मणिपुर की तरह खेल के नियमों को बदलती रहती है.” सूत्रों ने कहा, “हम यह सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त सावधानी बरत रहे हैं  कि हमारे सभी एमएलए मौजूद हैं.”

  3. सूत्रों ने कहा कि बीजेपी ने सचिन पायलट को मुख्यमंत्री पद का ऑफर देने से इनकार कर दिया है. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पास 45 विधायकों का समर्थन है और उनकी पहली प्राथमिकता अब अशोक गहलोत सरकार को गिराने की है. नेताओं के एक वर्ग ने कहा कि सचिन पायलट ने कांग्रेस आलाकमान को संकेत दिया है कि वह एक क्षेत्रीय पार्टी बनाने के लिए तैयार हैं और बीजेपी में शामिल नहीं होंगे.

  4. सूत्रों ने कहा कि सचिन पायलट को राज्यसभा चुनाव से पहले हॉर्स-ट्रेडिंग की जांच में पूछताछ के लिए उपस्थित होने के लिए कहा गया था. राजस्थान के मुख्य सचेतक महेश जोशी द्वारा राज्यसभा चुनाव से पहले दायर की गई शिकायत पर शुक्रवार को स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप द्वारा पायलट को तलब किया गया था.

  5. सचिन पायलट के विश्वासपात्र विधायकों ने जांच के आदेश के बाद विद्रोह की धमकी दी है. पायलट के करीबी सूत्रों ने कहा, “इससे पहले कभी राज्य अध्यक्ष या उपमुख्यमंत्री को इस तरह का पत्र नहीं दिया गया.” उन्होंने कहा, “आलाकमान ने हस्तक्षेप करने के लिए कुछ नहीं किया है.”

  6. गहलोत ने कहा है कि उन्हें मुख्य सचेतक के साथ-साथ पूछताछ के लिए सम्मन भी मिला है और सहयोग करना उनका कर्तव्य है. “कोई भी कानून से ऊपर नहीं है,” सूत्रों ने उन्हें यह कहते हुए उद्धृत किया. गहलोत ने कल कहा कि बीजेपी पाला बदलने के लिए विधायकों को 15 करोड़ रुपये तक दे रही है. गहलोत ने कल शाम एनडीटीवी से कहा, “आपने इसे गोवा, मध्य प्रदेश और उत्तर-पूर्वी राज्यों में देखा.”

  7. सचिन पायलट 2018 में राजस्थान में कांग्रेस की जीत के बाद मुख्यमंत्री पद के दावेदार माने जा रहे थे. उन्हें उप मुख्यमंत्री का पद दिया गया. लेकिन यह राज्य कांग्रेस प्रमुख के पद का पुरस्कार था, राज्य में पार्टी के पुनर्निर्माण के लिए उनके काम को मान्यता दी गई थी, जिसने गहलोत को नाराज किया. सचिन पायलट के 6 साल तक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को संभालने के बाद अब उन्हें हटाने की भी बातचीत चल रही है. 

  8. सरकार बनने के बाद से श्री पायलट और मुख्यमंत्री के बीच मतभेद नियमित रूप से सामने आते रहे हैं. पिछले साल, लोक सभा चुनावों के बाद, गहलोत ने अपने बेटे की हार के लिए श्री पायलट को दोषी ठहराया. “पायलट को जिम्मेदारी लेनी चाहिए,” मुख्यमंत्री ने कहा था. 

  9. 200 सदस्यों वाली राजस्थान विधानसभा में कांग्रेस के पास मजबूत 107 सीटें हैं और उसे 12 निर्दलीय उम्मीदवारों का  समर्थन प्राप्त है. इसके अलावा, अन्य दलों के पांच एमएलए – राष्ट्रीय लोक दल, सीपीएम और भारतीय ट्राइबल पार्टी गहलोत का समर्थन करते हैं.

  10. मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के 23 विधायकों के साथ बीजेपी में शामिल होने के बाद पार्टी के पुराने संरक्षक और नए के बीच लंबे समय तक खींचतान के बाद कमलनाथ सरकार का पतन हो गया था.

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