COVID-19 Drug Remdesivir and Tocilizumab is in scarcity, black entrepreneurs take over – मुंबई में आसानी से नहीं मिल रही कोरोना इलाज में कारगर दवा Remdesivir और Tocilizumab, हो रही कालाबाजारी

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कोरोना से बचाव में कारगर Remdesivir की ब्‍लैक मार्केटिंग हो रही है

मुंंबई:

Coronavirus Pandemic: कोरोना वायरस से बचाव में बेहद कारगर रेमडेसिवीर (Remdesivir) इंजेक्शन को देश में मंजूरी मिले दो सप्ताह से ज्यादा हो गए हैं लेकिन कोरोना के कई गंभीर मरीजों की जिंदगी बचाने वाली ये दवा अभी तक बाजार में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है. ऐसे समय जब महाराष्‍ट्र और महानगर मुंबई में कोरोना के केसों की संख्‍या तेजी से बढ़ रही है, Remdesivir की कालाबाजारी कर महंगे दामों पर बाजार में बेचे जाने की खबर सामने आई है.इसकी क़ीमत ब्लैक में 50 हजार रुपये तक की बताई जा रही है. एक अन्‍य ज़रूरी ऐंटी वायरल टोसिलिजुमैब (Tocilizumab)इंजेक्शन 40 हज़ार के क़रीब की क़ीमत में बिक रही है.

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मुंबई में कोराना के इलाज में कारगर इन दोनां दवाओं के लिएकोरोना मरीज के परिजनों की लंबी लाइन लग रही है. ये एंटी वायरल दवा के लिए घाटकोपर के फ़ार्मास्युटिकल डीलर के पास लाइन लगा कर खड़े हैं! रेमडेसिवीर और टोसिलिजुमैब जैसी दवा कोविड-19 के गंभीर रोगियों के उपचार के लिए शक्तिशाली जीवन रक्षक एंटी-वायरल दवा के रूप में ली जा रही है. जाहिर में ऐसे में इनकी डिमांड खूब है लेकिन स्टॉक में दवा नहीं. फ़ूड एंड ड्रग फ़ाउंडेशन का दावा है कि एसिमप्टोमैटिक यानी बिना लक्षण के मरीज़ों के नाम पर इन दवाओं की कालाबाज़ारी शुरू हो चुकी है

फ़ूड एंड ड्रग लाइसेंस होल्डर फ़ाउंडेशन के अध्‍यक्ष अभय पांडे कहते हैं, ‘एसिमपटोमैटिक (Asymptomatic) मरीज़ों के नाम पर जो प्रिसक्रिप्शन निकलते हैं उसके कारण ये ब्लैक मार्केटिंग बढ़ रही है क्‍योंकि यह सिर्फ़ क्रिटिकल पेशंट के लिए है लेकिन इन दिनों जो हॉस्पिटल या जहां से भी चिट्ठी बन रही है वो Asymptomatic के नाम से बनकर सप्लायर के पास जाती हैं. वहां से ब्लैक मार्केटिंग शुरू होती है इसकी सूचना हमारी एसोसिएशन ने महाराष्ट्र एफडीए को भी दी है. मुंबई के बड़े अस्पतालों में शामिल लीलावती अस्पताल से जुड़े जाने-माने वरिष्ठ डॉक्टर जलील पारकर ख़ुद कोविड-19 पॉ‍जिटिव होकर ड्यूटी पर लौटे हैं. जब वे बीमार थे तब उनहें भी Tocilizumab जैसी दवा नहीं मिल पाई थी. वे बताते हैं कि उनके कई मरीज़ भी रेमडेसिवीर और टोसिलिजुमैब जैसी दवा के इंतेज़ार में हैं.

 डॉ. पारकर ने कहा, ‘मुझे और मेरे परिवार के लिए भी दवा नहीं मिल पाइ थी.आज की तारीख़ में भी दवा नहीं. मेरे तीस से पैंतीस पेशेंट हैं जिसमें10 को टोसिलिजमैब और बाक़ी को रेमदेसिविर चाहिए. कहां से लाएं. इस मामले में अस्पताल की गलती नहीं है.”इन ज़रूरी दवाओं की ब्लैक मार्केटिंग को लेकर सरकार भी हरकत में आ गई है.महाराष्‍ट्र सरकार के मंत्री असलम शेख़ ने कहा, ‘’पहले एक ही कम्पनी बना रही थी. अब दूसरी कम्पनी को अधिकार दिया गया है. लेकिन बाज़ार में आने में वक्त लगेगा. दवा की कालाबाजारी के दौर में कुछ लोगों द्वारा 4000 की दवा को 40 से 50 हजार में खरीदने की शिकायत मिली है. इसे देखते हुए दवा ख़रीदने वालों के लिए आधार कार्ड कम्पल्सरी किया गया है. और इनके लोकेशन की ट्रैकिंग रखी जा सकती है. 

रेमडेसिवीर दवा अभी तक भारत में नहीं बनाई जाती है लेकिन कोरोना के चलते हाल ही में डीसीजीआई ने सिप्‍ला, हेटेरो और मायलेन लैबोरेटरी कंपनी को इसके मैन्युफैक्चर और ड्रग मार्केटिंग की अनुमति दी है. कालाबाज़ारी की खबरों के बीच सिप्ला ने रेमडेसिवीर की कीमत 4,000 रुपये जबकि हेटेरो ने 5,400 रुपये तय की है. लेकिन Actemra की Tocilizumab injection की क़ीमत अब भी 31,500, से 40,500 रुपये तक तक है.

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